Father Kamil Bulkey

*फादर कामिल बुल्के* के बारे में कुछ जानकारी शेयर करना चाहूंगा
स्वर्गीय डॉ कामिल बुल्के का जन्म सन् 1909 में बेल्जियम के ‘रैम्सचैपल’ नामक गांव में हुआ था और उनका देहावसान 17 अगस्त सन् 1982 में नई दिल्ली, भारत में हुआ।
 बुल्के जी आरंभ से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। यद्यपि सन् 1930 में उन्होंने लुधेन विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री ली, परंतु उनकी धार्मिक प्रवृत्तियों ने उन्हें सन् 1930 में जेसुएट-1 की सदस्यता लेने को प्रेरित किया। सन् 1932 में उन्होंने रोम के ग्रिगोरियन विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्रा में एम.ए किया। सन् 1934-35 में मिशनरी कार्यों के लिए वे भारत आए।
भारत में कार्य करना उन्हें इतना प्रेरणादायक लगा कि वे भारत में ही बस गए। शुरुआती दौर में उन्होंने दार्जिलिंग के एक स्कूल में गणित पढ़ाते हुए खड़ी बोली, ब्रज और अवधी सीखी। सन् 1938 में सीतागढ़, हजारीबाग में पंडित बदरीदत्त शास्त्री से हिंदी और संस्कृत सीखी। सन् 1940 में प्रयाग से विशारद की परीक्षा पास की और फिर सन् 1942-44 में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए किया।
भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के अध्ययन की गहनता को और अधिक गहनतम करने के लिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन् 1949 में ‘रामकथा’ पर डी.फिल. किया। बाद में तुलसी दास के रामचरित मानस का गहन अध्ययन कर, सन् 1950 में उन्होंने ‘राम कथा की उत्पत्ति और विकास’ पर पी.एच.डी की। उसी वर्ष ही वे ‘बिहार राष्ट्र भाषा परिषद्’ के कार्य कारिणी सभा के सदस्य नियुक्त किये गए। कुछ समय बाद सन् 1972-77 तक वे भारत सरकार के ‘केंद्रीय हिंदी समिति’ के सदस्य रहे।
डा. कामिल बुल्के एक लंबे समय तक रांची के सेंट जेवियर्स कालेज में संस्कृत तथा हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे। बाद में बहरेपन के कारण कालेज में पढ़ाने से अधिक उनकी रुचि गहन अध्ययन और स्वाध्याय में होती चली गई।
 डा. धीरेन्द्र वर्मा को अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए वे अपनी आत्म कथा ‘एक इसाई की आस्था, हिंदी-प्रेम और तुलसी-भक्ति 2’ में लिखते हैं, ‘‘सन् 1945 में डा. धीरेन्द्र वर्मा की प्रेरणा से मैंने एम.ए. के बाद इलाहाबाद से डा. माता प्रसाद के निरीक्षण में शोध कार्य किया।’’ इलाहाबाद के प्रवास को वे अपने जीवन का ‘द्वितीय बसंत’ कहते थे। महादेवी वर्मा को वे ‘दीदी’ और इलाहाबाद के लोगों को वे ‘मायके वाले’ कहते थे। बुल्के जी अपने समय के प्रति सजग एवं सचेत थे। भारत और भारतीयता (भारत की स्वस्थ परंपराओं) के अनन्य भक्त कामिल बुल्के जी, बौद्धिक और आध्यात्मिक होने के साथ-साथ ईसा के परम भक्त थे। साथ ही गोस्वामी तुलसीदास की राम भक्ति के सात्विक और आध्यात्मिक आयाम के प्रति उनके मन में बहुत आदर था।
सन् 1951 में डा. कामिल बुल्के ने भारतीय नागरिकता ले ली। उनका कहना था कि हिंदी तथा भारतीय संस्कृति के प्रति उनके आकर्षण का मूल स्रोत उनके अपने विद्यार्थी जीवन के संस्कार में था।
सन् 1935 में जब वे भारत प्रवास पर आए तो उन्हें यह देख कर दुःख और आश्चर्य दोनों हुआ कि भारत के अधिकांश शिक्षित  सन् 1950 में उन्होंने खुद को और अधिक परिमार्जित एवं परिष्कृत करने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ‘राम कथा उत्पत्ति और विकास’ पर शोध किया। 600 पृष्ठों में लिखा गया यह शोधग्रंथ चार भागों में विभक्त है। प्रथम भाग में ‘प्राचीन राम कथा साहित्य’ का विस्तृत विवेचन है, जिसके अंतर्गत पांच अध्याय में वैदिक साहित्य, राम कथा, वाल्मीकि रामायण, महाभारत की रामकथा, बोद्ध तथा जैन रामकथा संबंधी पूर्ण परीक्षण हैं और साथ ही राम कथा एवं उत्पत्ति का विवेचन है।
 डा. कामिल बुल्के का तुलसी कृत ‘रामचरित मानस’ पर आधारित यह शोधप्रबंध, शोधकर्ताओं के लिए बहुमूल्य ग्रंथ और पथप्रदर्शक है। भारत एवं विश्व के बहुत से विद्वान उन्हें राम-कथा और उसकी उत्पत्ति का विशेषज्ञ मानते हैं। इसीलिए रामायण और हिंदी के सम्मेलनों और आयोजनों में वे अध्यक्षता के लिए संपूर्ण भारत में कई बार बुलाए गए।
 डा. कामिल बुल्के की तीन पुस्तकें ‘मुक्तिदाता’ (जीजस क्राईस्ट का जीवन)  सन् 1942 में, ‘राम कथा उत्पत्ति और विकास’ सन् 1950 में इलाहाबाद से छपी और ‘नया विधान’ (न्यू टेस्टामेंट का हिंदी अनुवाद)  1977 में रांची से प्रकाशित हुआ। अंतिम पुस्तक ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ अनुवाद करते-करते वे स्वर्ग सिधार गए।
डा. कामिल बुल्के हिंदी भाषा, वाल्मीकी और संत तुलसीदास के अनन्य प्रेमी एवं भक्त थे। मूलतः वे ईसाइ थे, किंतु ईसाइ धर्म और जीजस क्राइस्ट में उनकी जितनी गहन आस्था थी, हिंदू धर्म तथा राम कथा के प्रति उनका उतना ही दृढ़ लगाव था। विभिन्न धर्मों की आंतरिक एकता के वे अनन्य उपासक थे। ईसा, हिंदी और तुलसीदास उनके जीवन के स्थाई तत्व भाव थे जिस पर उनका सारा जीवन और साहित्य केंद्रित है। 
उनका ईसाइ धर्म के साथ-साथ हिंदू धर्म के प्रति अनुराग आज के विचलित संसार में एक अद्भुत उदाहरण है। शायद इसीलिए डा. कुंदन अमिताभ उन्हें ‘अनोखे साहित्यकार’ कहते हैं। ईसा-भक्त परिवार में जन्म होने के कारण, ईसा-भक्ति और प्रेम के बीज उनके हदय में उनके माता-पिता ने डाले थे। प्रेम और आस्था उनके जीवन का स्थाई भाव था।
डा. बुल्के प्रतिदिन बाईबिल के साथ-साथ रामचरितमानस का भी स्वाध्याय करते थे। रामचरित मानस उनके लिए केवल एक महाकाव्य नहीं था, वह उनके लिए एक ऐसा जीवन दर्शन था जो उन्हें अपनी आत्मा के निकट लाता था। रामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड का पारायण करते हुए, लक्ष्मण और उनकी माता सुमित्रा के बीच हुए संवाद से अनायास ही उन्हें अपनी माता की याद आ जाती। वे लिखते हैं, ‘‘मेरी मां का उत्तर मुझे सुमित्रा के शब्दों से मिलता-जुलता उत्तर लगा, ‘‘पुत्रावती युवती जग सोई, रघुपति भगतु जासु सुत होई।’’ सन् 1938 ई. में उन्होंने रामचरित मानस तथा विनयपत्रिका को प्रथम बार आद्योपांत पढ़ा। रामायण के पारायण से उनके हृदय में गोस्वामी तुलसीदास के प्रति जो श्रद्धा उत्पन्न हुई उसमें उन्हें ऐसी आध्यात्मिक अनुभूतियां मिलीं जो आगे चल कर उनके जीवन के स्थाई भाव बन गए। साहित्य तथा धर्म के विषय में फादर बुल्के की धारणाओं (वैचारिकता)  में उस श्रद्धा भक्ति का गहरा विश्वास मिलता है जो तुलसीदास के मानस में पूरी संपूर्णता के साथ वक्त होता है।

 

बुल्के मानते हैं कि सृष्टि, कला और साहित्य का लक्ष्य सौंदर्य है, किंतु यह सीमित नहीं बल्कि अनंत है।
उनका  कहना था, ‘‘तुलसीदास के कारण मैंने वर्षों तक राम कथा साहित्य का अध्ययन किया है। लोक संग्रह उस महान् साहित्यिक परंपरा की एक प्रमुख विशेषता है और उस दृष्टि से तुलसीदास रामकथा-परंपरा के सर्वोत्तम प्रतिनिधि हैं। उन्होंने रामचरित के माध्यम से जिस भक्ति-मार्ग का प्रतिपादन किया है, उसमें नैतिकता तथा भक्ति के अनिवार्य संबंध पर बहुत बल दिया है।’’ अपनी और तुलसी की तुलना करते हुए डा. कामिल लिखते हैं, ‘‘तुलसी के इष्देव राम हैं और मैं ईसा को अपना इष्देव मानता हूं, फिर दोनों के भक्तिभाव में बहुत कुछ समानता पाता हूं। अंतर अवश्य है- इसका एक कारण यह भी है कि मुझमें तुलसी की चातक टेक का अभाव है।’’
वस्तुतः देखा जाए तो डा. कामिल बुल्के में भी तुलसी जैसा ही भक्ति-भाव है, प्रेम है, विनती है, समर्पण है। दोनों एक ही भक्ति-भाव और एक ही भातृ-भाव से जुड़े हए हैं।
हिंदी भाषा और साहित्य सदा डा. बुल्के का आभारी रहेगा। उन्होंने रामचरितमानस और हिंदी भाषा साहित्य को विश्व साहित्य में स्थान दिलाने का अपने जीवन काल में श्रेष्ठ प्रयास किया। उनकी हिंदी सेवा को स्वीकार करते हुए भारत सरकार ने 1974 में उन्हें पद्मश्री और बाद में, पद्म विभूषण आदि कई सम्मानों से विभूषित किया।🎄

How I went from 95kg to 69kg in 2 months only……

The Fit Indian – Daily Health, Fitness and Diet Tips

How I went from 95kg to 69kg in 2 months only

Hi! My name Mishti, I am from Calcutta. I am 28, I am married and have two children. During my free time I enjoy socializing with girlfriends and doing photography. My hobby, besides pleasant emotions, me explore the world of beauty and art, and even made me think about my own appearance: it turns out that all over the world, the women strive to be slim, to have a thin waist and flat stomach, firm buttocks and thighs. And no cellulite, of course! No matter what people say to the contrary it seems a person’s appearance does make a lot of difference. Though I don’t quite meet the standards of beauty being on the heavy side but an effort could be made to achieve that. I had nothing to lose except for the excess weight but could gain a lot in terms of confidence, fit body and could possibly ward of many unwanted things caused by being overweight

I do not quite meet these standards of beauty.

We are a modern family and my husband was not against me starting to go to the gym. Sure, my body got a little lift up, and I did manage to lose weight. But on the , physical exercise gives an incredible feeling of hunger! So, I began to look for alternative ways for slimming. I took Ayurveda drugs and went on a diet. I was not happy with the results, I was always starving, I felt weak and fatigued, I have a bad mood, and, to my shame, a couple of times I even allowed to be harsh towards my husband. Luckily, he understood what I was going through and took the whole thing under control.

My husband works in a private medical clinic and, after consulting with experienced doctors, he got me a really unique weight loss product – Green Coffee Beans. It is a natural supplement that increases the metabolism, eliminates the feeling of hunger and removes all excessive fat! In addition, it promotes healing of the whole body cleansing it from the inside, rejuvenates and ensures, as they say now, a deep detox of all organs and systems. To make it short, the slimming originates from the inside, thus achieving good and lasting results. You have to boil one teaspoon of pure green coffee beans in 300 ml of water for 7-8 minutes,then filter it and consume it as lukewarm,twice a day..half n hour before breakfast and dinner. They say that some lose up to 20 even 30 kg with Green Coffee beans only! Can you imagine?

Already in the first days of the course with Green Coffee Beans, I noticed a nice change. The feeling of freshness and excellent mood were back, excessive appetite was gone and I didn’t feel bloated anymore. The intestines began to work like clockwork! During the first week my waist got considerably thinner. I think this is due to the process of detoxification of the body and the normalization of digestion. I got on the scales about a month after I stared the treatment, right when I finished the first packet of Green Coffee Beans. The result was quite shocking! I lost 12 kilos! At the same time, the skin was supple and tight, without any stretch marks. The cellulite was hardly visible. I was really thrilled and decided to continue with the Green Coffee, why not, if this product has no contraindications and you can take as much as you need to achieve the desired results. I achieved my ideal figure exactly in two months, losing 26 kilograms. Now I look as good as the girls on the cover of a European magazine (mind you, I have two children!) Honestly, now I feel confident and attractive young woman and my husband looks at me with particularly longing eyes and regularly brings expensive gifts. Is there any downside? None! Green Coffee Beans offer an effective and natural way to lose weight that combines scientific research and Ayurvedic experience of generations, which will suit modern women and ladies with the conservative views.

By the way, only for the readers of my blog, I found out that Green Coffee Beans could be ordered online, in the official web store. Be sure to try it!


World class designs available …

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Statements made by the Roman Catholic Church about the Sabbath…

Most Christians assume that Sunday is the biblically approved day of worship. The Catholic Church protests that it transferred Christian worship from the biblical Sabbath (Saturday) to Sunday, and that to try to argue that the change was made in the Bible is both dishonest and a denial of Catholic authority. If Protestantism wants to base its teachings only on the Bible, it should worship on Saturday.” — Rome’s Challenge immaculateheart.com/maryonline Dec 2003.“Is not every Christian obliged to sanctify Sunday and to abstain on that day from unnecessary servile work? Is not the observance of this law among the most prominent of our sacred duties? But you may read the Bible from Genesis to Revelation, and you will not find a single line authorizing the sanctification of Sunday. The Scriptures enforce the religious observance of Saturday, a day which we never sanctify.” — James Cardinal Gibbons, The Faith of Our Fathers (1917 edition), p. 72-73 (16th Edition, p 111; 88th Edition, p. 89).“For example, nowhere in the Bible do we find that Christ or the Apostles ordered that the Sabbath be changed from Saturday to Sunday. We have the commandment of God given to Moses to keep holy the Sabbath day, that is the 7th day of the week, Saturday. Today most Christians keep Sunday because it has been revealed to us by the [Roman Catholic] church outside the Bible.” — Catholic Virginian, October 3, 1947, p. 9, article “To Tell You the Truth.”

“For example, nowhere in the Bible do we find that Christ or the Apostles ordered that the Sabbath be changed from Saturday to Sunday. We have the commandment of God given to Moses to keep holy the Sabbath day, that is the 7th day of the week, Saturday. Today most Christians keep Sunday because it has been revealed to us by the [Roman Catholic] church outside the Bible.” — Catholic Virginian, October 3, 1947, p. 9, article “To Tell You the Truth.”

Who Made Sunday Holy?

“Written by the finger of God on two tables of stone, this Divine code (ten commandments) was received from the Almighty by Moses amid the thunders of Mount Sinai…Christ resumed these Commandments in the double precept of charity–love of God and of the neighbour; He proclaimed them as binding under the New Law in Matthew 19 and in the Sermon on the Mount (Matthew 5)…The (Catholic) Church, on the other hand, after changing the day of rest from the Jewish Sabbath, or seventh day of the week, to the first, made the Third Commandment refer to Sunday as the day to be kept holy as the Lord’s Day…He (God) claims one day out of the seven as a memorial to Himself, and this must be kept holy…” — The Catholic Encyclopaedia, vol. 4, “The Ten Commandments”, 1908 edition by Robert Appleton Company; and 1999 Online edition by Kevin Knight, Imprimatur, John M. Farley, Archbishop of New York.

“Question:How prove you that the church had power to command feasts and holydays?

“Answer:By the very act of changing the Sabbath into Sunday, which Protestants allow of and therefore they fondly contradict themselves by keeping Sunday strictly, and breaking most other feasts commanded by the same church.

“Perhaps the boldest thing, the most revolutionary change the Church ever did, happened in the first century. The holy day, the Sabbath, was changed from Saturday to Sunday. ‘The day of the Lord’ was chosen, not from any direction noted in the Scriptures, but from the (Catholic) Church’s sense of its own power…People who think that the Scriptures should be the sole authority, should logically become 7th Day Adventists, and keep Saturday holy.” — St. Catherine Church Sentinel, Algonac, Michigan, May 21, 1995.

“Nowhere in the Bible is it stated that worship should be changed from Saturday to Sunday…Now the Church…instituted, by God’s authority, Sunday as the day of worship. This same Church, by the same divine authority, taught the doctrine of Purgatory long before the Bible was made. We have, therefore, the same authority for Purgatory as we have for Sunday.” — Martin J. Scott, Things Catholics Are Asked About, 1927 edition, p. 136.

“Question – Which is the Sabbath day?

“Answer –Saturday is the Sabbath day.

“Question –Why do we observe Sunday instead of Saturday?

“Answer –We observe Sunday instead of Saturday because the Catholic Church, in the Council of Laodicea (A.D. 364), transferred the solemnity from Saturday to Sunday.” — Rev. Peter Geiermann, C.S.S.R., The Convert’s Catechism of Catholic Doctrine, p. 50, 3rd edition, 1957.

“Is Saturday the seventh day according to the Bible and the Ten Commandments? I answer yes. Is Sunday the first day of the week and did the Church change the seventh day – Saturday – for Sunday, the first day? I answer yes. Did Christ change the day’? I answer no!” “Faithfully yours, J. Card. Gibbons.” — James Cardinal Gibbons, Archbishop of Baltimore, Md. (1877-1921), in a signed letter.

“Question. – How prove you that the Church hath power to command feasts and holy days?

“Answer. – By the very act of changing Sabbath into Sunday which Protestants allow of; and therefore they fondly contradict themselves, by keeping Sunday strictly, and breaking most other feasts commanded by the same Church.

“Question. – How prove you that?

“Answer. – Because by keeping Sunday, they acknowledge the Church’s power to ordain feasts, and to command them under sin: and by not keeping the rest by her commanded, they again deny, in fact, the same power.” — An Abridgment of the Christian Doctrine, composed by Henry Tuberville, p. 58.

“Some theologians have held that God likewise directly determined the Sunday as the day of worship in the New Law, that He Himself has explicitly substituted the Sunday for the Sabbath. But this theory is now entirely abandoned. It is now commonly held that God simply gave His Church the power to set aside whatever day or days she would deem suitable as Holy Days. The (Roman Catholic) Church chose Sunday, the first day of the week, and in the course of time added other days as holy days.” — John Laux, A Course in Religion for Catholic High Schools and Academies, 1936 edition, vol. 1, p. 51. 1

“Question.What warrant have you for keeping Sunday preferably to the ancient sabbath which was Saturday?

“Answer. We have for it the authority of the Catholic church and apostolic tradition.

“Question.Does the Scripture anywhere command the Sunday to be kept for the Sabbath?

“Answer.The Scripture commands us to hear the church (St.Matt.18:17; St. Luke 10:16), and to hold fast the traditions of the apostles. 2 Thess 2:15. But the Scripture does not in particular mention this change of the Sabbath. “St John speaks of the Lord’s day (Rev 1:10) but he does not tell us what day of the week that was, much less does he tell us what day was to take the place of the Sabbath ordained in the commandments. St.Luke speaks of the disciples meeting together to break bread on the first day of the week. Acts 20:7. And St. Paul (1 Cor.16:2) orders that on the first day of the week the Corinthians should lay in store what they designated to bestow in charity on the faithful in Judea: but neither the one or the other tells us that this first day of the week was to be henceforth a day of worship, and the Christian Sabbath; so that truly the best authority we have for this ancient custom is the testimony of the church. And therefore those who pretend to be such religious observers of Sunday, whilst they take no notice of other festivals ordained by the same church authority, show that they act more by humor, than by religion; since Sundays and holidays all stand upon the same foundation, namely the ordinance of the (Roman Catholic) church.” — Catholic Christian Instructed, 17th edition, p. 272-273. “Protestantism, in discarding the authority of the (Roman Catholic) Church, has no good reasons for its Sunday theory, and ought logically to keep Saturday as the Sabbath.” — John Gilmary Shea, American Catholic Quarterly Review, January 1883.

Get fairness in 14days only….

भारतीय पा रहे हैं ५ शेड तक गोरी त्वचा बस १४ दिनों में: आपको उनके परिवर्तन पर विश्वास भी नहीं होगा!

– आपको विश्वास नहीं होगा कि किस तरह ये भारतीय पुरुष और स्त्रियां १४ दिन में और अधिक गोरे बन रहे हैं. वे हमेशा से ज्यादा गोरे लग रहे हैं! बहुत से लोगों ने उनका राज़ जानने की कोशिश की: क्या ये रासायनिक लेप है, लेज़र उपचार है या बस अच्छी रोशनी है?

सच्चाई इससे भी कहीं आसान(और सस्ती) है. यह कोई उनका मेकअप नहीं है जिससे कि वे ५ शेड अधिक गोरे लग रहे हैं. कई सालों की कोशिश के बाद अंततः हमारे सूत्रों ने त्वचा गोरी करने के उस रहस्य को खोज निकाला है जिससे कि बॉलीवुड में तहलका मच गया है – और पूरे विश्व में इसका प्रयोग बहुत से चालाक पुरुषों और महिलाओं द्वारा किया भी जा रहा है.

“त्वचा गोरा करने का चमत्कारिक आविष्कार – क्योंकि यह सच में काम करता है!”

त्वचा के लिए सबसे अच्छा उपाय जिसके बारे में आपने कभी भी नहीं सुना होगा

महंगी त्वचा गोरी करने वाली क्रीमें, जो कि बड़े-बड़े वादे तो करती हैं परन्तु कुछ भी परिणाम नहीं देती हैं, उन पर रूपये बरबाद करने के बजाय हमारे पाठकों ने एक ऐसा स्किन प्रॉडक्ट खोज़ निकाला है जो कि बस कुछ सौ रूपए में आपको ५ शेड गोरा बना देगा. काम करने का तरीका जाने के लिए आगे पढ़ें!

“इस १ आसान से उत्पाद से मेघा कक्कड ने मात्र १४ दिनों में ५ शेड अधिक गोरी त्वचा प्राप्त की”

मेघा, एक २४ साल की बैंगलोर की लड़की, इसका अच्छा उदाहरण है कि कैसे थोड़ी सी चतुराई भरी सोच और सरलता अनावश्यक स्वास्थ्य ज़ोखिमों से बचाने में मदद कर सकती है और डॉक्टर्स के लाखों के खर्चे से आपको बचा सकती है.

अन्य महिलाओं की तरह मेघा के पास हर अभिनेत्री के द्वारा प्रचारित की जाने क्रीम को आजमाने के लिए अधिक धन नहीं था. केवल “Miracle Glow” अकेले ही सभी महंगी वैकल्पिक चिकित्सा प्रक्रियाओं जैसे रासायनिक पीलिंग या लेजर उपचार को पीछे छोड़ देती है.

मेघा का उपाय

एक साल की लगातार खोज़ और अलग-अलग महिलाओं और पुरुषों से उनकी त्वचा सम्बंधित आदतों के बारे में जानने के बाद, उसे एक उत्पाद के बारे में ज्ञात हुआ जो कि वास्तविकता में परिणाम दे रहा था और लोगों को ५ शेड गोरा भी कर रहा था: Miracle Glow body cream.

अपने त्वचा उत्पादों की सूची में Miracle Glow को जोड़ने के बाद उसे आइने में ध्यान देने योग्य परिणाम दिखाई पड़ने लगे. केवल २ सप्ताह बाद सबूत उसके पूरे शरीर में दिख रहा था: यह उसे वास्तविकता में परिणाम दे रहा था.

नियमित Miracle Glow के प्रयोग करने के बाद, मेघा को ऐसे परिणाम दिखाई पड़ने लगे थे जो कि किसी भी २०,००० या उससे भी अधिक की दवा से नहीं आ पाए थे. इसने लगभग ९०% काले धब्बे और दागों को हटा दिया. इसने उसे ५ शेड गोरी और दाग धब्बों से रहित त्वचा प्रदान की. मेघा इन परिणामों को शरीर गोरे करने वाले मिश्रण Miracle Glow के माध्यम से केवल १४ दिनों में देख पा रही थी.

यह कैसे काम करता है?

अपनी खोज़ के माध्यम से मेघा ने पाया कि Miracle Glow का असली रहस्य २ प्रकार के घटकों में है.

  • कुसुम बीज जिनमें कि लिनोलेइक एसिड होता है और
  • कागज़ी शहतूत, मुसब्बर और नद्यपान के सत

ये दोनों ही प्रकार के घटक प्राकृतिक हैं जो कि साथ मिल कर पूरे शरीर के काले धब्बे और दाग को कोशिकीय स्तर पर त्वचा के नीचे से हटाते हैं – इसलिए यह बहुत ही कारगर है.

मेघा की कहानी और १४ दिन के Miracle Glow के इस्तेमाल के परिणाम:

“सबसे अच्छी बात यह है कि Miracle Glow में शुद्ध कोजिक एसिड और अल्फा आरब्यूटिन की एकदम सही उच्च सांद्रता मौज़ूद हैं. मैंने यह भी पाया कि इसमें सभी प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट, डरमैक्सिल नामक एक घटक ( जो कि शरीर की त्वचा को खिंचाव देने वाले तत्व के रूप में भी जाना जाता है) और एस्टर- सी (विटामिन सी में त्वचा को सक्रिय करने वाला यौगिक) भी मौजूद हैं. अनुदेश पालन करने में बहुत ही आसान पर बहुत ही विशिष्ट थे: उनका पालन विधि पूर्वक करना बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सच में अंतर आता है. आपको अपने शरीर की त्वचा को धुलने और पोंछने के बाद सोने के पहले Miracle Glow का हल्का सा लेप लगाना होता है. मैंने तो केवल एक रात में ही अंतर देखा, पर १४ दिन बाद परिणाम चौंकने वाले थे. मैं पहले से ५ शेड गोरी लग रही थी लोग अब मुझसे अलग तरह से व्यवहार करते हैं!” – मेघा

दिन १:

Miracle Glow के पहले दिन के प्रयोग के बाद मैं यह देख के आश्चर्यचकित थी कि इसने मेरी त्वचा कितनी शानदार बना दी थी. मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा हर रोमछिद्र किसी भारी वैक्यूम क्लीनर से साफ़ हो रहा था.

मैं नहीं जानती कि कैसे इसका बखान करूँ! मैं अपने चेहरे पर, आँखों के चारो तरफ, मेरे माथे पर और यहां तक कि पूरे शरीर में गुनगुनी सिहरन की अनुभूति कर सकती थी. मैंने आईने में देखा और पाया कि मेरे शरीर में लालिमा आ गयी थी – नवीनीकरण के परिणामस्वरुप रक्त मेरी त्वचा की सतह की तरफ़ तेजी से प्रवाहित हो रहा था ताकि मेरी त्वचा नयी हो सके. Miracle Glow के मेरी त्वचा में अवशोषण के बाद मेरा पूरा शरीर एक सुन्दर चमक लिए हुए गोरा हो गया था.

दिन ५:

Miracle Glow के ५ दिन के प्रयोग के बाद मैं इतने बड़े परिणाम को देख कर आश्चर्यचकित हो गयी थी.

काले धब्बे, आँखों के नीचे का कालापन और दाग बिना किसी दिक्कत के मेरी आँखों के सामने, अपने आकार में कम होने लगे थे!

मैं अपने परिणामों से अचम्भित हो गयी थी, और सच में बहुत अच्छा महसूस कर रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे सारे काले धब्बे और दाग धुल गए थे!


दिन १४:

१४ दिन बाद, न केवल मेरे सारे संदेह और अविश्‍वास ख़त्म हो गए – बल्कि मेरे सारे काले धब्बे और आँखों के नीचे के सारे दाग भी चले गए थे!

काले धब्बे और आँखों के नीचे के सारे दाग पूरी तरह से गायब हो गए थे, मैं पहले से गोरी प्रतीत हो रही थी. मैंने इससे पहले ऐसी कोई भी चीज़ नहीं देखी जो कि इस गति से मुझे गोरा कर सके, फिर चाहें वह उत्पाद कितना भी महंगा क्यों न था!

२ सप्ताह बाद मेरी त्वचा वहीँ पर टिक गयी और हर दिन पहले से अच्छी होती जा रही थी, जब तक कि मैं आज जैसी सुन्दर और चमकदार नहीं हो गयी. इस समय तक मेरे सारे दोस्त और परिवार के लोग चौंक गए थे. उनको मेरे इस परिवर्तन पर विश्वास नहीं हो रहा था और वे कह रहे थे कि मैं झूठ कह रही हूँ कि मैंने कोई भी कॉस्मेटिक सर्जरी नहीं करवाई है!

क्या यह आपके लिए काम करेगी?

आज के समय में त्वचा की देखभाल सम्बन्धी चालबाजों की कमी नहीं है और उनमे से भी ज्यादातर बहुत ही महंगे हैं. इतने सारे विकल्पों के होने के कारण आपके लिए यह स्वाभाविक है कि आप इसके परिणामों के लेकर संदेह में पड़ जाएँ इसीलिए मैं आपको चुनौती देती हूँ कि आप भी वही करें जो कि मैंने किया: ख़ुद आज़मा कर देखें खुद अपनी परीक्षा ले कर देखें और घर पर ही आइने में शानदार परिणाम देखें. आप अपने पहले और बाद के प्रतिबिम्ब में विश्वास नहीं कर पाएंगे

यह याद रखने वाली बात है कि Miracle Glow आपकी संतुष्टि की १००% गारंटी अन्यथा पूरी कीमत वापस की शर्त के साथ आता है. 50% की सीमित समय की छूट के साथ आप अपनी त्वचा को पहले से बहुत ज्यादा कोमल बना पाएंगे. लेकिन जल्दी करें, ये शानदार ट्रायल हमेशा नहीं रहें

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ऋचा द्वारा प्रेषित

मैं और मेरे मित्र Miracle Glow का समाचार में आने का इंतज़ार कर रहे थे. कम से कम हममे से ५ लोग Miracle Glow का रोज़ इस्तेमाल करते हैं. यह सच में शानदार है और इसने हमारे जीवन को बदल दिया है. उन सभी को मेरी तरफ से शुभकामनाएं जो कि इस ख़ास अवसर का फायदा उठा रहे हैं.

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कृति द्वारा प्रेषित

मैंने इस उत्पाद को टाइम्स नाओ और इंडिया टुडे में देखा. पर मैं नहीं जानती थी कि इसे कैसे मंगवाया जाए; और तब मुझे आपकी वेबसाइट मिली जो कि शानदार है, क्योंकि मैं किसी ऐसी चीज़ के लिए रूपए नहीं खर्च करना चाहती, जिसके बारे में मैं नहीं जानती कि वह काम भी करती है या नहीं. मैं प्रयोग के दूसरे महीने में हूँ और कहना चाहती हूँ कि.. यह सच में काम करता है और मेरे परिणाम चौकाने वाले हैं. आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस लेख को लिखने और प्रयोग करने के लिए.

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प्रिया द्वारा प्रेषित

मैं २ महीने से इसे स्टॉक में नहीं पा रही थी! ट्रायल के लिए धन्यवाद, यह मुझे बचा लेगा. Fit Mom Daily का धन्यवाद! धन्यवाद प्रिया

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सुनील द्वारा प्रेषित

मैंने इसकी रिपोर्ट को टी.वी. पर देखा और महसूस किया कि मर्दों के लिए भी Miracle Glow सच में काम करता है!!! मैं निसंदेह इसे ऑर्डर करने वाला हूँ, इससे पहले की यह फिर से पूरी तरह बिक जाए! टिप्स देने के लिए धन्यवाद और आपको यह भी बताना चाहिए कि मर्दों के लिए भी यह कितनी असरदायक है, इसे अगली बार मत भूलना.